शोक सन्देश। दुनिया को ली-आयन बैटरी देने वाले नोबेल पुरस्कार विजेता गुडइनफ़ का निधन

गुडइनफ ने कंप्यूटर के लिए रैंडम एक्सेस मेमोरी (रैम) के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई

लिथियम-आयन बैटरी के अमेरिकी सह-आविष्कारक और रसायन विज्ञान के लिए 2019 नोबेल पुरस्कार के सह-विजेता जॉन बैनिस्टर गुडएनफ का निधन हो गया है। वह 101 साल के होने से सिर्फ एक महीना पीछे थे।
गुडइनफ की मौत की पुष्टि उनके छात्र निकोलस ग्रुंडिश ने बिजनेसलाइन को की है।ब्रिटिश-अमेरिकी वैज्ञानिक स्टैन व्हिटिंगम, जिन्होंने गुडइनफ के साथ नोबेल पुरस्कार साझा किया था, यह बताने वाले पहले व्यक्ति थे कि लिथियम को टाइटेनियम सल्फाइड की शीट के भीतर संग्रहित किया जा सकता है। गुडएनफ़ ने कोबाल्ट-आधारित कैथोड के साथ इसे परिष्कृत करके एक ऐसा उत्पाद बनाया जो आज सभी के जीवन को प्रभावित करती है।
गुडइनफ ने कंप्यूटर के लिए रैंडम एक्सेस मेमोरी (रैम) के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
नोबेल पुरस्कार वेबसाइट के अनुसार, जॉन गुडएनफ़ का जन्म जर्मनी के जेना में अमेरिकी माता-पिता के यहाँ हुआ था। येल विश्वविद्यालय में गणित का अध्ययन करने के बाद, उन्होंने द्वितीय विश्व युद्ध के समय सेना मे मौसम विज्ञानी के रूप में भी काम किया है ।

 

इसके बाद उन्होंने शिकागो विश्वविद्यालय में अध्ययन किया और 1952 में भौतिकी में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की। बाद में उन्होंने यूके में मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी और ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में काम किया।
उन्होँने टेक्सास विश्वविद्यालय में प्रोफेसर के रुप मे सेवायें दी थीं।
2008 में, गुडइनफ़ ने अपनी आत्मकथा, विटनेस टू ग्रेस लिखी, जिसे उन्होंने “मेरा व्यक्तिगत इतिहास” कहा। पुस्तक विज्ञान और आध्यात्मिकता को छूती है।
आईआईटी-बीएचयू के प्रोफेसर प्रीतम सिंह, जो गुडइनफ के छात्रों में से एक थे, याद करते हैं कि नोबेल पुरस्कार विजेता “एक महान व्यक्तित्व, महापुरुष थे, वे हमेशा चर्चा, सुझाव और मदद के लिए हमेशा तैयार रहते थे।”
पांडिचेरी विश्वविद्यालय के प्रोफेसर रामासामी मुरुगन, जो गुडइनफ के एक अन्य भारतीय छात्र हैं, नोबेल पुरस्कार विजेता के गुडइनफ के गुणो को बताते हैं वे दयालुता, ईमानदारी, हास्य की भावना और सबसे बढ़कर, उनमें एक अनोखी हंसी की बहुत सराहना करते हैं।

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